Raksha Bandhan: राखी के इस पावन पर्व की शुरुआत कैसे हुई? जानिए मां लक्ष्मी से जुड़ी प्राचीन कथा


रक्षाबंधन का महत्व:  रक्षाबंधन एक पवित्र हिंदू पर्व है, जिसे श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है.इस दिन बहन अपने भाई को राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती है.बदले में भाई जीवनभर अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है और उपहार देता है.इस पर्व में स्नेह, विश्वास और सुरक्षा का गहरा भाव छिपा होता है.

रक्षाबंधन का महत्व: रक्षाबंधन एक पवित्र हिंदू पर्व है, जिसे श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है.इस दिन बहन अपने भाई को राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती है.बदले में भाई जीवनभर अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है और उपहार देता है.इस पर्व में स्नेह, विश्वास और सुरक्षा का गहरा भाव छिपा होता है.

रक्षाबंधन की शुरुआत: धार्मिक कथाओं के अनुसार रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत माता लक्ष्मी ने की थी.सबसे पहले माता लक्ष्मी ने ही अपने भाई को राखी बांधी थी.यह परंपरा तभी से चली आ रही है, जो आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है.

रक्षाबंधन की शुरुआत: धार्मिक कथाओं के अनुसार रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत माता लक्ष्मी ने की थी.सबसे पहले माता लक्ष्मी ने ही अपने भाई को राखी बांधी थी.यह परंपरा तभी से चली आ रही है, जो आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है.

2025 का रक्षाबंधन विशेष क्यों? इस वर्ष रक्षाबंधन 9 अगस्त को मनाया जाएगा.इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा.इसके साथ ही, इस दिन कई विशेष और दुर्लभ योग भी बन रहे हैं, जो लगभग 40 वर्षों बाद एक साथ बन रहे हैं.

2025 का रक्षाबंधन विशेष क्यों? इस वर्ष रक्षाबंधन 9 अगस्त को मनाया जाएगा.इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा.इसके साथ ही, इस दिन कई विशेष और दुर्लभ योग भी बन रहे हैं, जो लगभग 40 वर्षों बाद एक साथ बन रहे हैं.

योगों का महत्व: 9 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग और सौभाग्य योग जैसे शुभ योग पूरे दिन विद्यमान रहेंगे.इसके अतिरिक्त, सूर्य और बुध के एक साथ कर्क राशि में स्थित होने से बुधादित्य योग बनेगा.वहीं, बृहस्पति और शुक्र के मिथुन राशि में होने से भी मंगलकारी योग बन रहा है, जो रक्षाबंधन के दिन को और अधिक शुभ बना रहा है.

योगों का महत्व: 9 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग और सौभाग्य योग जैसे शुभ योग पूरे दिन विद्यमान रहेंगे.इसके अतिरिक्त, सूर्य और बुध के एक साथ कर्क राशि में स्थित होने से बुधादित्य योग बनेगा.वहीं, बृहस्पति और शुक्र के मिथुन राशि में होने से भी मंगलकारी योग बन रहा है, जो रक्षाबंधन के दिन को और अधिक शुभ बना रहा है.

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा बलि ने अश्वमेध यज्ञ किया.तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर तीन पग भूमि का दान मांगा.राजा बलि ने सहमति दे दी.भगवान ने विशाल रूप धारण कर तीन पग में पूरी पृथ्वी नाप ली और बलि को पाताल लोक दे दिया.

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा बलि ने अश्वमेध यज्ञ किया.तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर तीन पग भूमि का दान मांगा.राजा बलि ने सहमति दे दी.भगवान ने विशाल रूप धारण कर तीन पग में पूरी पृथ्वी नाप ली और बलि को पाताल लोक दे दिया.

विष्णु और माता लक्ष्मी: राजा बलि ने भगवान विष्णु से वरदान मांगा कि वे सदैव उनके सामने रहें.भगवान ने वचन निभाते हुए पाताल लोक में राजा बलि के साथ रहने का निर्णय लिया.जब माता लक्ष्मी को यह ज्ञात हुआ, तो वे चिंतित हो गईं और नारद मुनि से सलाह लीं.

विष्णु और माता लक्ष्मी: राजा बलि ने भगवान विष्णु से वरदान मांगा कि वे सदैव उनके सामने रहें.भगवान ने वचन निभाते हुए पाताल लोक में राजा बलि के साथ रहने का निर्णय लिया.जब माता लक्ष्मी को यह ज्ञात हुआ, तो वे चिंतित हो गईं और नारद मुनि से सलाह लीं.

राखी की शुरुआत: नारद जी की सलाह पर माता लक्ष्मी वेश बदलकर राजा बलि के पास गईं और उन्हें राखी बांधकर भाई बना लिया.बदले में उन्होंने भगवान विष्णु को वापस मांग लिया.राजा बलि ने वचन निभाया और विष्णु जी को माता लक्ष्मी के साथ जाने दिया.तभी से रक्षाबंधन की यह परंपरा चली आ रही है कि बहन राखी बांधकर अपने भाई से रक्षावचन लेती है.

राखी की शुरुआत: नारद जी की सलाह पर माता लक्ष्मी वेश बदलकर राजा बलि के पास गईं और उन्हें राखी बांधकर भाई बना लिया.बदले में उन्होंने भगवान विष्णु को वापस मांग लिया.राजा बलि ने वचन निभाया और विष्णु जी को माता लक्ष्मी के साथ जाने दिया.तभी से रक्षाबंधन की यह परंपरा चली आ रही है कि बहन राखी बांधकर अपने भाई से रक्षावचन लेती है.

Published at : 08 Aug 2025 01:45 PM (IST)

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