शम्स तबरेज की शिक्षा: दिल की आग से मिलता है असली ज्ञान! जानें कैसे बदल सकती है ज़िंदगी?

Shams Tabrizi Teachings: महान सूफी संत शम्स तबरेज कहते थे, इल्म किताबों से नहीं, दिल की आग से आता है. उनका मतलब यह था कि असली इल्म सिर्फ किताबों और तालीम से हासिल नहीं होता, बल्कि दिल की चाहत, रूह की तड़प और अल्लाह की तलाश से मिलता है.
किताब इंसान को रास्ता दिखा सकती हैं, लेकिन असली सीख और समझ दिल से आती है. शम्स की यह सोच सिर्फ धर्म या रूहानी तक पाबंद नहीं थी, बल्कि इसमें मोहब्बत और इंसानियत की भी अहमियत बताई गई है. यहीं वजह है कि उनकी बातें आज भी लोगों के लिए हौसला बनी हुई हैं. चलिए जानते हैं इस अनोखे पैगाम के बारे में.
13वीं सदी में शम्स का अनोखा पैगाम
शम्स तबरेज 13वीं सदी के महान सूफी संत थे, जिनकी मुलाकात मशहूर कवि और फलसफी जलालुद्दीन रूमी से हुई थी. रूमी की जिंदगी का असल रूहानी मोड़ तभी आया जब वह शम्स से मिले और उनकी गहरी बातें और तालीम से मुतासिर हुए.
कहा जाता है कि उसी दौर में उन्होंने ये ख्याल पेश किया, जब वो रूमी को असली जागरूकता और हकीकी इल्म की राह दिखा रहे थे. उस वक्त लोग समझते थे कि इल्म सिर्फ किताबों और तालीम से हासिल होता है. लेकिन शम्स तबरेज ने इस सोच को बदल दिया.
उनका कहना था कि किताबें सिर्फ राह दिखाने का जरिया हैं, लेकिन असल इल्म दिल की आग से आता है, यानी अल्लाह की तलाश, मोहब्बत और रूह की तड़प से पैदा होता है. शम्स की यही तालीम रूमी की सोच और शायरी में साफ झलकती है. इसी वजह से उनकी ये खास पैगाम आज भी लोगों को राह दिखाती है.
दिल की आग का मतलब क्या है?
“दिल की आग” यानी कि इंसान के अंदर की तड़प और जुनून. इसका मतलब है रूह की खोज, अल्लाह की तलाश और इंसानियत के लिए सच्ची मोहब्बत. जब कोई इंसान अपने दिल में इस आग को महसूस करता है, तो यह उसे अंदर से बदल देती है और रूहानी उन्नति की तरफ ले जाती है.
यह सिर्फ पढ़ाई या किताबों से नहीं आती, बल्कि दिल और रूह की लगन से पैदा होती है. यही दिल की आग इंसान को सच्चे इल्म, हकीकी सुकून और दिल की सुकून तक पहुंचाती है. यही वजह है कि यह आग हर सच्चे इंसान के लिए अहम है.
रूमी पर गहरा असर
शम्स तबरेज की तालीम का सबसे गहरा असर उनके शागिर्द और बड़े शायर जलालुद्दीन रूमी पर पड़ा. शम्स से मुलाकात के बाद रूमी की सोच और उनकी शायरी बिल्कुल बदल गई. उनकी कविताओं और कलाम में दिल की तड़प, मोहब्बत और रूहानी तलाश साफ झलकती है.
रूमी का कलाम महज अल्फाज नहीं रहा, बल्कि उसमें दिल की गर्मी और अल्लाह से लगाव भर गया. यह सब शम्स की सोहबत और उनकी सीख का नतीजा था. कहा जाता है कि अगर शम्स न होते, तो शायद रूमी का नाम आज इतनी गहराई और रूहानियत से जुड़ा न होता.
आज के समाज के लिए पैगाम
आज के दौर में लोग अक्सर समझते हैं कि इल्म सिर्फ डिग्रियों और किताबों से मिलता है. लेकिन शम्स तबरेज की सीख हमें याद दिलाती है कि असली इल्म सिर्फ दिमाग से नहीं, बल्कि दिल और रूह की गहराई से आता है. इंसानियत, मोहब्बत और अल्लाह से लगाव ही वह असल नूर है, जो किसी को पूरा इंसान बनाता है.
आज जब जिंदगी सिर्फ दौलत, शोहरत और दिखावे में उलझी है, शम्स का पैगाम हमें यह समझता है कि असली सुकून किताबों या नाम से नहीं बल्कि दिल की सफाई, रूह की तलाश और मोहब्बत से आता है. यही इल्म इंसान को कामयाब और काबिल-ए-एहतराम बनाता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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