सितंबर में व्रत-त्योहारों की धूम! चंद्र ग्रहण से लेकर नवरात्रि तक, जानें खास तिथियां और शुभ मुहूर्त

Bhadrapad 2025: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के साथ सितंबर माह का आरंभ हो रहा है. व्रत-त्योहार के लिहाज से यह महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस महीने अनंत चतुर्दशी, एकादशी, नवरात्रि के साथ-साथ कई बड़े व्रत त्योहार पड़ रहे हैं. इसके साथ ही इस महीने पितृ पक्ष का भी आरंभ हो रहा है.
ऐसे में इस माह में दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है. वहीं, सितंबर में ग्रहण भी लगने जा रहा है. श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि इस बार सितंबर का महीना धार्मिक उत्सवों और अनुष्ठानों के साथ ही खगोलीय घटनाओं की वजह से भी खास होने वाला है.
सितंबर का महीना तीज-त्योहारों से भरा
सितंबर की शुरुआत गणेश उत्सव के साथ हो रही है. इसके बाद उनका विसर्जन होगा और अगले दिन पितृ पक्ष के अनुष्ठान के लिए लोग तैयारी करेंगे. इसके तुरंत बाद मां दुर्गा के आगमन की धूमधाम शुरू हो जाएगी.
ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि सितंबर का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है. इस महीने में कई बड़े पर्व और व्रत आने वाले हैं. जिनमें गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी, जीवित्पुत्रिका व्रत, वामन जयंती और शारदीय नवरात्रि जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं.
इसके साथ ही भाद्रपद पूर्णिमा के बाद पितृ पक्ष की शुरुआत होगी. जिसके दौरान लोग अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध करेंगे. इसी महीने साल का अंतिम चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण भी पड़ेगा, जो खगोलीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है.
सितंबर का महीना मां दुर्गा को समर्पित
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा ने बताया कि आश्विन महीने की शुरुआत होने वाली है. यह महीना जगत की देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है. इस महीने में कई प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं. इनमें शारदीय नवरात्र और पितृ पक्ष प्रमुख हैं.
इसके साथ ही सर्वपितृ अमावस्या, इंदिरा एकादशी, आश्विन शिवरात्रि, आश्विन प्रदोष व्रत और जितिया व्रत भी मनाए जाएंगे. यह महीना धार्मिक महत्व के साथ-साथ ग्रहों की चाल और खगोलीय घटनाओं की वजह से भी खास रहेगा. भाद्रपद मास की पूर्णिमा के बाद पितृपक्ष आरंभ होगा.
जहां लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेंगे. इसके बाद नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना होगी. इस दौरान कई पर्व एक के बाद एक आने वाले हैं, जिससे भक्तों में धार्मिक उत्साह और भी बढ़ेगा.
सितंबर माह में बुध का राशि परिवर्तन
सितंबर माह की शुरुआत बुद्धि और वाणी के ग्रह बुध से होगी. बुध 4 सितंबर से कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. फिर इसके बाद ग्रहों के राजा सूर्य 16 सितंबर से कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य के राशि परिवर्तन करने से कन्या राशि में सूर्य और शुक्र की युति बनेगी.
16 सितंबर के बाद 18 सितंबर को सुख, वैभव और भोगविलास के कारक शुक्र तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे. बुध फिर 23 सिंतबर को सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश कर जाएंगे. इस तरह के सितंबर माह में ग्रहों के राशि परिवर्तन करने से कुछ राशि वालों को विशेष लाभ मिल सकता है.
3 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा ने बताया कि 3 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी होगी. इसके बाद 4 सितंबर को वामन जयंती मनाई जाएगी. 6 सितंबर को गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी का बड़ा पर्व होगा. फिर 7 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा व्रत और साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगेगा.
8 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी. 10 सितंबर को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत होगा. वहीं 14 सितंबर को माताएं जीवित्पुत्रिका व्रत रखेंगी. इसके बाद 17 सितंबर को एकादशी श्राद्ध, इंदिरा एकादशी और कन्या संक्रांति का संयोग रहेगा.
18 सितंबर को गुरु पुष्य योग बनेगा, तो 19 सितंबर को मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत मनाया जाएगा. 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी, जिसके साथ श्राद्ध पक्ष का समापन होगा. 22 सितंबर को शारदीय नवरात्रि घटस्थापना के साथ आरंभ होगी.
25 सितंबर को विनायक चतुर्थी और स्कंद षष्ठी आएंगे. महीने का समापन 30 सितंबर को दुर्गाष्टमी और सरस्वती पूजा के साथ होगा.
सितंबर माह में 2 खगोलीय घटनाएं घटित
टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि सितंबर में दो खगोलीय घटनाएं घटित होंगी. पहला 7 सितंबर को साल का अंतिम चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत में दिखाई देगा. यह रात 9:58 बजे शुरू होकर 8 सितंबर की रात 1:26 बजे समाप्त होगा.
इसका सूतक काल दोपहर 12:57 बजे से प्रारंभ हो जाएगा. वहीं, 21 सितंबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण होगा. यह भारत में दिखाई नहीं देगा. लेकिन भारतीय समयानुसार यह रात 11 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की सुबह 3:24 बजे तक रहेगा.
सितंबर व्रत-त्योहार
- 01 सितंबर 2025 – ज्येष्ठ गौरी पूजा
- 02 सितंबर 2025 – ज्येष्ठ गौरी विसर्जन
- 03 सितंबर 2025 – परिवर्तिनी एकादशी
- 04 सितंबर 2025- वामन जयंती, भुवनेश्वरी जयन्ती और कल्की द्वादशी
- 05 सितंबर 2025- ओणम, शिक्षक दिवस और शुक्र प्रदोष व्रत
- 06 सितंबर 2025- गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी
- 07 सितंबर 2025- भाद्रपद पूर्णिमा व्रत और पूर्णिमा श्राद्ध
- 08 सितंबर 2025- पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा
- 10 सितंबर 2025- विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी
- 11 सितंबर 2025 – महा भरणी और पंचमी तिथि का श्राद्ध
- 12 सितंबर 2025- मासिक कार्तिगाई
- 14 सितंबर 2025 – जीवित्पुत्रिका व्रत और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
- 17 सितंबर 2025 – एकादशी श्राद्ध, इंदिरा एकादशी, कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा
- 19 सितंबर 2025- मासिक शिवरात्रि और शुक्र प्रदोष व्रत
- 21 सितंबर 2025 – सर्वपितृ अमावस्या, दर्श अमावस्या और आश्विन अमावस्या
- 22 सितंबर 2025- शारदीय नवरात्रि शुरू, घटस्थापना और महाराजा अग्रसेन जयन्ती
- 25 सितंबर 2025 – विनायक चतुर्थी
- 27 सितंबर 2025 – संकंद षष्ठी
- 30 सितंबर 2025 – सरस्वती पूजा और मासिक दुर्गाष्टमी
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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