DU में ग्रेजुएट प्रोग्राम की हजारों सीटें अब भी खाली, स्पॉट राउंड से शुरू हुई नई प्रक्रिया


दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में इस साल स्नातक प्रोग्रामों में दाखिले की प्रक्रिया अब भी पूरी नहीं हो सकी है. बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं, खासकर आरक्षित वर्ग में. इन्हें भरने के लिए विश्वविद्यालय ने गुरुवार को स्पॉट राउंड के माध्यम से सीट आवंटन किया है.

कितने छात्रों को मिला मौका?

इस राउंड में कुल 29,819 छात्रों ने आवेदन किया था. इनमें से 7,908 छात्रों को सीट आवंटित की गई है. अब छात्रों को 29 अगस्त की शाम 5 बजे तक यह सीट स्वीकार करनी होगी. अगर कोई छात्र इस सीट को स्वीकार नहीं करता है तो उसका नाम दाखिला प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा.

डीयू प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस राउंड में आवंटित सीट ही अंतिम मानी जाएगी. इसका मतलब यह है कि छात्रों को अब अपग्रेड का विकल्प नहीं मिलेगा और न ही वे दाखिला वापस ले सकेंगे.

किन्हें मिला मौका?

इस स्पॉट राउंड में सिर्फ उन्हीं छात्रों को मौका दिया गया है, जिन्हें जुलाई से लेकर 24 अगस्त तक किसी भी कॉलेज या कोर्स में दाखिला नहीं मिल पाया था. पहले से दाखिला पा चुके छात्रों को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया.

विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि कॉलेज और कोर्स का आवंटन छात्रों की प्राथमिकता और खाली सीटों के आधार पर किया गया है. इससे साफ है कि डीयू के स्नातक कोर्सों में अब भी करीब 8,000 से ज्यादा सीटें खाली हैं. इनमें सामान्य वर्ग की सीटें कम हैं, जबकि आरक्षित वर्ग की सीटें ज्यादा संख्या में बची हुई हैं.

कब तक करनी होगी फीस जमा?

जिन छात्रों को सीट आवंटित की गई है, उन्हें 29 अगस्त तक सीट स्वीकार करनी होगी. इसके बाद 30 अगस्त शाम 5 बजे तक फीस का भुगतान करना अनिवार्य होगा. फीस का भुगतान समय पर न करने वाले छात्रों का दाखिला स्वतः रद्द हो जाएगा.

डैशबोर्ड फ्रीज मोड में

डीयू ने बताया है कि इस राउंड के बाद जिन छात्रों को सीटें मिली हैं, उनके लिए यह अंतिम मौका होगा. पहले से दाखिला पा चुके छात्रों का डैशबोर्ड फ्रीज मोड पर चला जाएगा. यानी वे अपने पहले वाले दाखिले को रद्द करके किसी नई सीट पर दाखिला नहीं ले पाएंगे.

क्यों रह गईं सीटें खाली?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल कई कारणों से डीयू की सीटें खाली रह गईं. कुछ छात्रों ने विदेशों और निजी विश्वविद्यालयों का रुख किया, जबकि कुछ ने अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला लेना पसंद किया. वहीं, आरक्षित वर्ग की अधिक सीटें इसलिए खाली रह गईं क्योंकि पर्याप्त आवेदन नहीं मिले.
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